प्लास्टिक कचरे को ग्रैन्युल में रीसाइकल करने वाला मिनी-प्लांट
- प्लास्टिक कचरे को ग्रैन्युल में रीसाइकल करने वाला मिनी-प्लांट एक कॉम्पैक्ट प्रोडक्शन समाधान है, जो सेकेंडरी प्लास्टिक (PET, PP, PE आदि) को कमर्शियल कच्चे माल में बदलने के लिए बनाया गया है, जो आगे मोल्डिंग व एक्सट्रूज़न प्रोसेस में इस्तेमाल के लिए उपयुक्त हो।
प्रोसेस की टेक्नोलॉजिकल स्कीम: कच्चा माल तैयार करना शुरुआती कचरा प्लास्टिक के प्रकार व गंदगी के स्तर के अनुसार सॉर्टिंग से गुज़रता है। श्रेडिंग श्रेडर या नाइफ़ क्रशर का उपयोग करते हुए सामग्री को 10–20 मिमी फ्रैक्शन तक तोड़ना। सफ़ाई गंदगी, लेबल और ऑर्गेनिक अशुद्धियाँ हटाने के लिए व्यापक वॉशिंग (कोल्ड/हॉट, फ्रिक्शन वॉशिंग सहित)। ड्राइंग मुख्य नमी हटाने के लिए सेंट्रीफ्यूज में और ज़रूरी रेज़िड्यूअल नमी पाने के लिए थर्मल ड्रायर में क्रमिक प्रोसेसिंग। मेल्ट प्रोसेसिंग तैयार कच्चे माल को एक्सट्रूडर (सिंगल- या ट्विन-स्क्रू) में पिघलाना, साथ ही मेश या ऑटोमैटिक फ़िल्टर से मेल्ट की फ़िल्ट्रेशन। ग्रैन्युल बनाना वॉटर-रिंग या स्ट्रैंड ग्रैन्युलेटर से मेल्ट की ग्रैन्युलेशन। फ़िनिशिंग प्रोसेसिंग तैयार सेकेंडरी ग्रैन्युल को कूल करना और स्टोरेज या ट्रांसपोर्टेशन के लिए पैकेजिंग।
मिनी-प्लांट के उपकरण की संरचना:
- कच्चा माल फ़ीड करने वाला सबसिस्टम (बेल्ट या वाइब्रेशन कन्वेयर)।
- सॉर्टिंग स्टेशन (सॉर्टिंग टेबल)।
- श्रेडिंग यूनिट।
- वॉशिंग लाइन (टैंक, फ्रिक्शन वॉशिंग)।
- ड्राइंग मॉड्यूल (सेंट्रीफ्यूज, थर्मल ड्रायर)।
- मुख्य प्रोसेसर (एक्सट्रूडर)।
- मेल्ट सफ़ाई सिस्टम (फ़िल्टर)।
- ग्रैन्युलेशन डिवाइस (ग्रैन्युलेटर)।
- तैयार उत्पाद स्टोरेज के लिए वेसल (बंकर, साइलो)।
- क्लोज़्ड-लूप एयर व वॉटर सफ़ाई सिस्टम।
प्रोसेस होने वाले प्लास्टिक के प्रकार:



- पॉलीएथिलीन (PE) — यूनिवर्सल सामग्री, फ़िल्म व कैनिस्टर बनाने के लिए उपयोग होती है।
- पॉलीप्रोपिलीन (PP) — उच्च मज़बूती के कारण बैग व बॉक्स बनाने में उपयोग होती है।
- PET (पॉलीएथिलीन टेरेफ्थैलेट) — प्लास्टिक बोतल बनाने के लिए मुख्य सामग्री।
- पॉलीस्टाइरीन (PS) और ABS — हल्केपन व मज़बूती के कारण विभिन्न उत्पादों की हाउज़िंग के लिए उपयोग होते हैं। ग्रैन्युलेशन के प्रारूप:
- वॉटर-रिंग ग्रैन्युलेशन — सॉफ्ट व गंदे मटीरियल की प्रोसेसिंग के लिए इष्टतम विकल्प।
- स्ट्रैंड ग्रैन्युलेशन — साफ़ कच्चे माल के साथ काम के लिए बनाई गई है।
- अंडरवॉटर ग्रैन्युलेशन — उच्च समरूपता वाले ग्रैन्युल पाने की ज़रूरत होने पर उपयोग होती है।
लाइन के मुख्य पैरामीटर:
- उत्पादकता — कॉन्फ़िगरेशन के अनुसार 100–150 kg/घंटा से 500–1000 kg/घंटा तक भिन्न होती है।
- ऊर्जा खपत — उपकरण के प्रकार और कच्चे माल की गंदगी के स्तर पर निर्भर करती है।
- ऑटोमेशन — सेमी-ऑटोमैटिक से लेकर पूरी तरह ऑटोमेटेड सिस्टम तक हो सकता है।
- स्टाफ — लाइन के संचालन के लिए प्रति शिफ्ट 3–6 लोग चाहिए। अतिरिक्त विकल्प:
- फ़िल्म के लिए एग्लोमरेटर — पतली-दीवार वाली सामग्री की प्रोसेसिंग दक्षता बढ़ाता है।
- मेटल डिटेक्टर — कच्चे माल से मेटल की अशुद्धियाँ हटाना सुनिश्चित करते हैं।
- एडिटिव डोज़र — प्रोसेसिंग के दौरान रंग व स्टेबलाइज़र डालने देते हैं।
- कंपाउंडिंग लाइन — विभिन्न प्लास्टिक व मॉडिफायर मिक्स करने के लिए उपयोग होती है।
सेकेंडरी ग्रैन्युल: उत्पादन व उपयोग मिनी-प्लांट का अंतिम उत्पाद है सेकेंडरी ग्रैन्युल, जिसका उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक उपयोग है। यह ग्रैन्युल इनके लिए उपयुक्त है:
- इंजेक्शन मोल्डिंग।
- पाइप व प्रोफाइल की एक्सट्रूज़न।
- फ़िल्म सामग्री का उत्पादन।
- टेक्निकल उत्पाद बनाना। ऐसा मिनी-प्लांट तभी सही है जब प्लास्टिक कच्चे माल की स्थिर सप्लाई हो। प्रोजेक्ट की मुख्य लाभप्रदता कई मुख्य फ़ैक्टर से बनती है:
- पहला, शुरुआती प्लास्टिक कचरे की कम कीमत और तैयार सेकेंडरी ग्रैन्युल की ज़्यादा कीमत के बीच के अंतर से।
- दूसरा, कच्चे माल की सफ़ाई की गहराई अहम भूमिका निभाती है, जो सीधे अंतिम उत्पाद की गुणवत्ता पर असर डालती है।
- तीसरा, उत्पाद की गुणवत्ता की स्थिरता निरंतर मांग सुनिश्चित करती है और वफ़ादार क्लाइंट बेस बनाने देती है। इस प्रकार, प्लास्टिक रीसाइक्लिंग मिनी-प्लांट सही उत्पादन प्रक्रिया संगठन के साथ एक आशाजनक बिज़नेस दिशा है।
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